Missions Related to Environment in hindi for UPSC

जलवायु परिवर्तन से संबंधित मिशन योजना

  1. राष्ट्रीय कार्य योजना-
    1. वर्ष 2008 में भारत में जलवायु परिवर्तन हेतु राष्ट्रीय कार्य योजना नेशनल एक्शन प्लान ऑन क्लाइमेट चेंज को अपनाया गया उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में सतत विकास का लक्ष्य हासिल करना|

    आधार के रूप में सौर ऊर्जा,ऊर्जा दक्षता, टिकाऊ कृषि एवं आवास जल हिमालय पारिस्थितिकी तंत्र वनावरण एवं विधि परिवर्तन संबंधी ज्ञान को चुना गया इसके तहत 8राष्ट्रीय मिशन चलाए गए

     

    1. राष्ट्रीय सौर मिशन -सौर ऊर्जा की भागीदारी बढ़ाना तथा परमाणु ऊर्जा भवन एवं बायोमास ऊर्जा जैसे नवीकरणीय स्रोतों की आवश्यकता को महत्व प्रदान करना है| वर्ष 2020 तक 20000 मेगा वाट सौर बिजली क्षमता स्थापित करना है प्रथम चरण जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय सौर मिशन नाम से चल रहा है|
    2.  राष्ट्रीय वर्धित ऊर्जा क्षमता मिशन- नेशनल मिशन फॉर  एनहांस एनर्जी एफिशिएंसी – नई संस्थागत प्रणालियों को शिक्षित करने का लक्ष्य ताकि ऊर्जा दक्ष बाजार का विकास किया जा सके इसके तहत सुपर एफिशिएंट कार्यक्रम चलाया जा रहा है|
    3. राष्ट्रीय  वहनीय पर्यावास मिशन- नगरों में वहनीय परिवर्तन ऊर्जा अनुकूल भवनों और वहनीयअपशिष्ट प्रबंधन का संवर्धन करना|

    4.रणनीति ज्ञान पर राष्ट्रीय मिशन- जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनोतियों का विज्ञान और स्वास्थ्य जनसांख्यिकी प्रवास और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों कि आप उपजीविका के क्षेत्रों में चुनोतियों के प्रत्युत्तर पर ज्ञान का प्रसार करना इसका उद्देश्य है|

    1. राष्ट्रीय जल मिशन -इसके अंतर्गत जल के अनुकूलतम प्रयोग हेतु फ्रेमवर्क के विकास के लिए एक नियामक मशीनरी की स्थापना करना जिसमें जल के प्रयोग में 20% बचत को बढ़ावा देने का लक्ष्य|
    2. राष्ट्रीय ग्रीन इंडिया मिशन- 20 फरवरी 2014 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक कार्य समिति द्वारा  केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में राष्ट्रीय ग्रीन इंडिया मिशन को मंजूरी दी गई लक्ष्य भारत के घटते वन क्षेत्र का संरक्षण और क्षेत्र में वृद्धि करना है साथी अनुकूलन एवं उपायों के द्वारा जलवायु परिवर्तन का सामना करना हरियाली के लिए एक समग्र दृष्टिकोण की परिकल्पना की गई साथी पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं विशेष रूप से जैव विविधता बायोमास मैंग्रोव संरक्षण जनों संकट में पर्यायवाची आदि प्रमुख रूप से ध्यान केंद्रित किया गया  इस मिशन का क्रियान्वन सार्वजनिक और निजी दोनों ही भूमियों पर किया जाएगा इस में महत्वपूर्ण भूमिका स्थानीय समुदायों की होगी|

    राष्ट्रीय ग्रीन इंडिया मिशन की अवधि 10 वर्ष निर्धारित की गई है| पूर्वोत्तर राज्यों के लिए योजना व्यय में 90% खर्च केंद्र सरकार और 10% राज्य द्वारा वहन किया जाएगा सभी राज्यों के लिए केंद्र एवं राज्य का खर्च अनुपात  75अनुपात 25 होगा| राष्ट्रीय ग्रीन इंडिया मिशन के उद्देश्य हैं-

    1. 5 मिलियन 1 या गैर वन भूमि पर वृद्धि करना कुल मिलाकर 10 हेक्टेयर भूमि
    2. प्रयोग प्रदर्शन हेक्टेयर क्षेत्र के प्रबंधन के परिणाम स्वरुप जैव विविधता विज्ञान सेवाओं और कार्बन पृथक्करण समिति की दशा में सुधार करना|
    3. और उनके आसपास रहने वाले 3 परिवारों की आधारित आजीविका आय में वृद्धि करना|
    4.  वर्ष 2020 में   कार्बन डाईऑक्साइड पृथक्करण में 50 से 60 मिलियन टन की वृद्धि करना |

     

    7.राष्ट्रीय सतत कृषि विकास मिशन– नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर- उद्देश्य ऐसी नहीं किसानों की फसलों का विकास करना जो वैश्विक तापमान के प्रभाव से स्वयं को बचा सके तथा जलवायु परिवर्तन का अच्छे ढंग से सामना कर सके|

    1. राष्ट्रीय हिमालई पारिस्थितिकी संवर्धन मिशन-

    हिमालय पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का अनुमान लगाने तथा प्रवृत्ति पारिस्थितिकी को संतुलित करने के उद्देश्य से हिमालय पर्यावरण के लिए निगरानी प्रणाली की जाएगी|

स्वच्छ ऊर्जा कोष नेशनल  क्लीन एनर्जी फंड- स्थापना 6 अप्रैल 2011 को देश में स्वच्छ और जया है इस वजह से संबंधित परियोजनाएं एवं अनुसंधान कार्यों की वित्तीय सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से की |इसके अंतर्गत उपयुक्त प्रयोग प्रोजेक्ट के निर्धारण के लिए एक अंतर मंत्री स्तरीय समूह का गठन किया गया है जो इन परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान करेगा इस कोर्स से संबंधित परियोजनाओं प्रोजेक्ट के कुल लागत के अधिकतम 40% भाग को ही कर्ज के रूप में दिया जाए|

BSE ग्रीन एप्स- इसकी शुरुआत वर्ष 2012 में बॉन्बे स्टॉक एक्सचेंज द्वारा विभिन्न कंपनियों के  कार्बन उत्सर्जन क्या है वर्तमान में बंद है बॉन्बे स्टॉक एक्सचेंज द्वारा भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद के सहयोग से किया गया है|

ICICI Bank स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया HDFC तथा Bhel इसके अंतर्गत कंपनियां है|

गृहा-

TERI ने नवीन  व अक्षय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोग से देश में सभी जलवायु प्रदेशों में भवनों को उनके संभावित प्रभाव पर्यावरणीय प्रभाव के आधार पर रेटिंग प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय रेटिंग तंत्र GRIHA  का निर्माण किया है इसमें देश बनने वाले नए भवनों की डिजाइन उनकी ऊर्जा बचत क्षमता तथा पर्यावरण पर उसके संपूर्ण जीवन काल में पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन कर रेटिंग प्रधान किया जाता है|

 

ऊर्जा संरक्षण बिल्डिंग कोड– इसकी शुरुआत मई 2007 में भारत सरकार के ऊर्जा मंत्रालय द्वारा की गई| यह देश के बिल्डिंग सेक्टर या भवन निर्माण सेक्टर में ऊर्जा संरक्षण को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है इसका विकास भारतीय ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के विशेषज्ञ समिति तथा यूनाइटेड स्टेट एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट के सहयोग से किया गया है |

कोयला तो इस वक्त ऊर्जा कर-

जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने के लिए वैश्विक स्तर पर किए जा रहे प्रयासों में कार्बन टैक्स की अवधारणा प्रमुख है जो कार्बन का उत्सर्जन करने वाले सभी वस्तुओं पर लगाया जाता है इसी के अंतर्गत वर्ष 2010 में भारत में कोयले पक्ष पूजा कर की शुरुआत की| जिस का हिस्सा राष्ट्रीय सुरक्षा कोष में जहां वर्ष 2014 15रुपैया 50 से 100 तक वर्ष 2016-17 मैं यह बढ़कर ₹400 प्रति टन हो गया है|

2030 जलवायु कार्य योजना-

भारत सरकार की 2030 जलवायु कार्य योजना के अंतर्गत स्वच्छ ऊर्जा विशेषकर नवीकरणीय ऊर्जा ऊर्जा दक्षता में वृद्धि काम कार्य क्षमता अपशिष्ट से धनार्जन को बढ़ावा देना पर्यावरण अनुकूलन परिवहन नेटवर्क प्रदूषण उपशमन वनावरण से कार्बन सिंक में वृद्धि तथा जलवायु परिवर्तन के संबंध में नागरिकों तथा निजी क्षेत्र का योगदान शामिल है|

महत्वपूर्ण बिंदु

  • 2030 तक घर जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा संसाधन से 40% संचित विद्युत संस्थापित क्षमता प्राप्ति 2022 तक नवीकरणीय  विद्युत क्षमता 175 गीगाबाइट करने का लक्ष्य|
  • सौर ऊर्जा के अंतर्गत 2022 तक सौर ऊर्जा से  100 गीगावॉट पवन ऊर्जा से 60 गीगावॉट बायोमास से 10 गीगावॉट लघु जल विद्युत से 5 किलो वाट
  • सकल घरेलू उत्पादन के दौरान कार्बन तथा अन्य ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन तीव्रता को वर्ष 2005 के स्तर की तुलना में 2020 तक 33- 35% तक कम करना
  • 2030 तक वनावरण में वृद्धि के माध्यम से ढाई से 3 बिलियन अतिरिक्त कार्बन उत्सर्जन कम करना
  • जलवायु परिवर्तन से संबंधित सम्मेलन

स्टॉकहोम सम्मेलन 1972

संयुक्त राष्ट्र में स्टॉकहोम स्वीडन में पर्यावरण से संबंधित सम्मेलन का आयोजन किया उसके बाद पर्यावरण अंतरराष्ट्रीय मुद्दा  बन गया इस सम्मेलन में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के गठन का निर्णय तथा 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया|

प्रथम पृथ्वी सम्मेलन रियो सम्मेलन 1992 ब्राजील के रियो डी जनेरियो संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सम्मेलन 1992 में 3 से 14 जून तक आयोजन किया गया इसमें विकसित एवं विकासशील 154 देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया|

प्रमुख उद्देश्य- भूमंडलीय तापमान ओजोन परत का क्षय एवं पूजन क्षेत्र वन विनाश जैव विविधता का ह्रास मौसम एवम जलवायु परिवर्तन सृष्टि टिकाऊ कृषि आदि समस्याओं के निदान हेतु विश्वव्यापी सर्वमान्य समिति बनाना उसे कार्यरूप देना इसी सम्मेलन में यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज अंतर्राष्ट्रीय संधि गठित की गई इस सम्मेलन के 5 मुख्यमंत्री निर्धारित किए गए थे

भूमंडलीय तापमान में वृद्धि, वन संरक्षण, जैव विविधता, एजेंडा 21 कार्यक्रम,  रियो घोषणा पत्र|

 

मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987-

ओजोन परत के क्षरण को रोकने के लिए 16 सितंबर 1987 को कनाडा में अग्रणी अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सम्मेलन क्लोरोफ्लोरोकार्बन के उत्पादन में अगले 10 वर्षों में कटौती करने का तथा हैलोजन गैस के उत्पादन को पूर्णतया समाप्त करने पर सहमति बनी थी|

 हेलसिंकी सम्मेलन 1989-

ओजोन छरण को बचाने के लिए क्लोरोफ्लोरोकार्बन इसके उपरांत मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एक जनवरी 1989 से प्रभावी|

लंदन सम्मेलन 1990-

विकसित देशों द्वारा वर्ष 2010 तक क्लोरोफ्लोरोकार्बन का उत्पादन पूर्णरूपेण रोकने का निर्णय|

कोपेनहेगन सम्मेलन 1992 ओजोन संरक्षण पर आयोजित इस सम्मेलन में मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए विकासशील देशों की मैं पुनः इसी संबंध में सम्मेलन हुआ|

बर्लिन सम्मेलन कोप -1(1995)

1995 में जर्मनी के बड़े शहर में  यूएनएफसीसीसी के सदस्य देशों द्वारा पहला सम्मेलन आयोजित किया गया कुल 170 प्रतिनिधियों ने भाग लिया इस सम्मेलन में भारत में उत्सर्जन प्रमोद तोड़ते हुए एक हरित पत्र प्रस्तुत किया जिसमें औद्योगिक देशों में वर्ष 2000 उनके सीओ2 उत्सर्जन में 20% कटौती करने की अपील की |

जिनेवा सम्मेलन कोप-2(1996)

जुलाई 1996 में स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में कब केंद्र आईपीसीसी के कार्यकारी समूह की सूची एवं नियंत्रण रिपोर्ट जारी की कथा साथी जनेवा में घोषणा पत्र के माध्यम से औद्योगिक देशों द्वारा उत्सर्जन घटाने हेतु क्रिया नियमन पर बल दिया गया|

क्योटो प्रोटोकॉल 1997

जलवायु परिवर्तन पर लंबी बहस के बाद जापान के क्योटो शहर में 11 दिसंबर 1997 को यूएनएफसीसीसी के तीसरे सम्मेलन स्वीकार किया कानूनी समझौता विकसित देशों से सामूहिक रुप से ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को वर्ष 1990 के लिए 2012 तक 5% 5.2% कटौती करने का प्रावधान रखा गया था इसमें NX 1 देशों द्वारा उत्सर्जित निम्न ग्रीन हाउस गैसों को शामिल किया गया कार्बन डाइऑक्साइड मीथेन नाइट्रस ऑक्साइड क्लोरोफ्लोरोकार्बन हाइड्रोक्लोराइड तथा सल्फर हेक्सा फ्लोराइड|

 

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