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Samadhi and its Types in Patanjal yoga sutra in hindi

समाधि क्या है ? महर्षि पतंजलि कहते है – “तदेवार्थ मात्रनिर्भाशम स्वरुप शुन्यमिव समाधि | 3/3|” योग सूत्र | अर्थात – जब ध्याता – ध्यान एवं ध्येय में से केवल धेय (अर्थ ) मात्र कि प्रतिति शेष रहता है और अपने स्वरुप का  भान नहीं रहता (शुन्य सा हो जाता है ) वह अवस्था समाधि  है …